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| Our universities are not any better, robbing another generation of opportunity. Colleagues in academia have a real fear of diversity. We all trumpet ethnic diversity, but balk at diversities that are the source of innovation and creativity. Why should a country like Indai not have all kinds of institutional structures?......... |
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Editorial |
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विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भारत में परिसर (कैम्पस) स्थापित करने तथा डिग्री प्रदान करने का मार्ग केन्द्रीय मंत्रिपरिषद् द्वारा विदेशी शैक्षिक संस्थान नियमन, नियंत्रण, गुणवता, सुनिश्चित करने व व्यापारीकरण पर रोक विधेयक को स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही खुला है। अब शीख्र ही विधेयक संसद के विचारार्थ प्रस्तुत किया जायेगा। देश में विदेशी शिक्षा संस्थाओं के प्रवेश का प्रश्न काफी समय से लम्बित था। देश की अर्थव्यवस्था को पूर्ण वैश्विक व्यवस्था के साथ जोड़ने के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में राज्य का नियंत्रण कम कर विदेशी पूंजी के प्रवेश व शिक्षण संस्थान स्थापित करने की अनुमति प्रदान करने का विषय चर्चा में आने लगा। अगस्त १९९५ में राज्य सभा में ऐसा विधेयक प्रस्तुत किया गया था, परन्तु विषय पर भारी मतभेदों के कारण आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी। कालान्तर में देश में आर्थिक विकास की आवश्यकताओं को दृष्टिगत कर बदहाल उच्च शिक्षा की दशा सुधारने की आवश्यकता प्राथमिकतापूर्वक अनुभव की गई। देश की आवश्यकता है कि उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना के साथ गुणात्मक सुधार के भी कदम प्राथमिकता से उठाये जायें। 2002 में विदेशी पूंजी निवेश के प्रवेश की अनुमति अवश्य दी गई परन्तु विदेशी शिक्षण संस्थानों को देश में कैम्पस स्थापित करने तथा डिग्री प्रदान करने पर रोक जारी रही................. |
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Pro. K. Narahari
(President ABRSM) |
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