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शरीर पंच तत्व से बना है- बाह्यं प्रक्रति के पंच तत्व सम्यक रहेंगे तो पाँच ज्ञानेन्दिर्यो के विषय अनुकूल रहेंगे-संवेदनशील रहेंगे,ये प्रतिकूल हुए तो वेदना उत्पन्न करेंगे, यही दु:ख का मूल है| अत: यह मंत्र सुखी होने का मंत्र है| हमारे प्रात: काल को ये सब मंगलमय करें- ऐसी आप सब की इच्छा है तो अपने-अपने हिस्से जे प्रयत्न का संकल्प करो………………
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