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Editorial |
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अंग्रेजी नव वर्ष 2012 भारी आशंकाओं और चुनौतियों के बीच प्रारंभ हुआ है। भारत में आपात काल एवं बोफोर्स कांड के पश्चात् एक बार पुनः जन्मानस बहुत ही उद्वेलित है। अन्ना हज़ारे व रामदेव जैसे व्यक्तियों ने भ्रष्टाचार, कालेधन व विदेशी banks में अवैध रूप से जमा भारी राशि के विरुद्ध जन-जन को जाग्रत करने का प्रयास किया है। अन्ना हज़ारे की जनलोकपाल बिल के माध्यम से जन-जन को भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने की मुहिम ने व्यापक असर दिखाया है। 43 वर्षों से राजनीतिज्ञ लोकपाल बिल का खेल खेलते रहे हैं। उन्होंने इसे व्यापक एवं प्रभावी बनाने के कभी भी गंभीर प्रयास नहीं किए। बोफोर्स के समय का आन्दोलन राजनीतिक दाव-पेचों की बलि चढ़ गया। किसी भी दोषी को न्यायालय तक भी नहीं ले जाया गया। सभी आरोपित व्यक्ति छल, बल व राजनीतिक संरक्षण से बाइज्जत बरी हुए। तब से भ्रष्टाचार रूपी गंगा में बहुत पानी बह चुका है। उदारीकरख की नीतियों ने जहा देश में आर्थिक विकास की गति............
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Shaikshik Samachar |
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