राष्ट्र यज्ञ की अग्नि ‘वंदेमातरम्’

भारतीय स्वाधीनता आंदोलन, भारत की राष्ट्रीय एकात्मता तथा भारत को वंदनीय मातृ-देवी के रूप में स्थापित करने वाले अमरगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में स्मरण-उत्सव का आयोजन इसके अमरत्व को और भी श्रेय बनाता है। वंदे मातरम् जैसा लघु-सूक्ति- वाक्य भारतीय जनमानस में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, त्याग, समर्पण तथा इसके संरक्षण का भाव भरता है। गीत में मातृभूमि की कल्पना एक सजीव, पवित्र, पोषक शक्ति के रूप में की गई है, जो अपनी संतानों से रक्षा और मुक्ति का आह्वान करती है। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् ने जिस प्रकार स्वाधीनता आंदोलन को क्रांति-पर्व में बदल दिया था, वैसे ही विजय- भाव का संचार युवाओं, विद्यार्थियों तथा सामान्य नागरिकों में समान रूप से आज भी करता है। व्यापक देशभक्ति के विचार को तीव्रगामी कर देने वाला वंदे मातरम् आज भारत को ‘विश्व पटल पर भी वैसे ही स्थापित कर रहा है, जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों के हृदय में पहले उद्वेलन उत्पन्न किया करता था। वंदे मातरम् आज भी भारत के स्वाभिमान,भारत के समग्र उत्थान तथा सर्वांगीण विकास का उद्घोष बना हुआ है । पूर्ण लेख देखने के लिए क्लिक करे

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